हनुमानगढ़ जिले में शहरी-ग्रामीण संक्रमण क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

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गुलाब चंद्र
डॉ. पिंकी कुमारी

Abstract

शहरी विकास की तेजी गति ने भारत के बहुत से क्षेत्रों में ग्रामीण एवं शहरी जीवन के बीच एक नए प्रकार के संक्रमण क्षेत्रों को जन्म दिया है। ये क्षेत्र शहरी-ग्रामीण संक्रमण क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं, जहाँ भूमि उपयोग में होने वाले परिवर्तन केवल भौगोलिक स्वरूप तक ही सीमित न होकर सामाजिक एवं आर्थिक संरचना को भी गभीर रूप से प्रभावित करते हैं।


हनुमानगढ़ जिला, जो एक समय तक प्राथमिक रूप से ग्रामीण एवं कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर आधारित रहा है, वर्त्तमान समय में शहरी विस्तार की प्रक्रिया के कारण शहरी-ग्रामीण संक्रमण क्षेत्रों का महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस जिला में भूमि उपयोग में होने वाले परिवर्तनों ने स्थानीय समाज, आजीविका के साधन, भूमि संबंधों, एवं आर्थिक व्यवस्था को बहुत तरह से परिवर्तत कर दिया है।


प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य हनुमानगढ़ जिला के शहरी-ग्रामीण संक्रमण क्षेत्रों में भूमि उपयोग परिवर्तन के सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण करना है। इस अध्ययन में भूमि उपयोग परिवर्तन को एक बहुआयामी सामाजिक-आर्थिक प्रक्रिया के रूप में देखने का प्रयास किया गया है।


अध्ययन के अंतर्गत यह स्पष्ट हुआ है कि कषि आधारित आजीविका में कमी, भूमि मूल्य में तेजी वद्धि, नवीन व्यापारिक एवं सेवा आधारित गतिविधियों का प्रसार, एवं सामाजिक संरचना में परिवर्तन शहरी-ग्रामीण संक्रमण क्षेत्रों की मुख्य विशेषताएं हैं। इस प्रकार यह अध्ययन शहरी-ग्रामीण संक्रमण क्षेत्रों में भूमि उपयोग परिवर्तन के सामाजिक-आर्थिक परिणाम को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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How to Cite
[1]
गुलाब चंद्र and ड. प. क. ., “हनुमानगढ़ जिले में शहरी-ग्रामीण संक्रमण क्षेत्र में भूमि उपयोग परिवर्तन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव”, IEJRD - International Multidisciplinary Journal, vol. 11, no. 1, p. 12, Feb. 2026.

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